लग गई उसे नजर <br><br>जिसे कमी न थी, कभी उजालों की<br><br>जरूरत है उन को, चाहने वालों की<br><br>कभी, होते थे रुबरू, नए ख्यालों से<br><br>अब उलझन में हैं, उन्हीं ख्यालों की <br><br>नए जज्बात कहां से, रोज लाएं हम <br><br>लग रही है झङी ये, नए सवालों की<br><br>चाह के भी नहीं मिलते, चाहने वाले<br><br>खलती, है ये कमी, चाहने वालों की<br><br>चाहने, वाले भी रहे नहीं, पहले जैसे<br><br>बदल गई है फितरत चाहने वालों की<br><br>वो, घिरे हुए हैं कब से, घने अंधेरों में<br><br>नजर लग गई उसे, सामने वालों की <br><br>तुम, बढ़ते चलो आगे, राह में यादव <br><br>हार होती नहीं कभी चलने वालों की<br><br></b>
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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