क्या तुम थोड़ा और इंतज़ार नहीं कर सकते
क्या तुम मुझसें फिर सें प्यार नहीं कर सकते
वक़्त की ग़म-ए-दुनिया में कहीं खो गई हूँ मैं
क्या बाहों की दर-ओ-दीवार नहीं कर सकते
तुम्हें तो मालूम हैं न मेरें हर सूरत-ए-हाल का
फिर क्यूँ गुस्से पऱ इख़्तियार नहीं कर सकते
तुम कहते हों बड़ी चिड़चिड़ी सी रहती हूँ मैं
क्या मेरे हाल पे थोड़ा विचार नहीं कर सकते
परेशाँ हूँ आजकल और क़ोई बात नहीं जानाँ
बेवफ़ा नहीं हूँ मैं क्या एतबार नहीं कर सकते
ख़बर हैं कृष्णा क़ो कुछ मुमकिन नहीं हमारा
पऱ क्या मुहब्बत के ख़ातिर इंकार नहीं सकते
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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