कैसे बताऊँ कहकर सब कुछ सुना गया।
दो घूंट पी रखी थी मेरा मौसम बना गया।।
जाने कब जिक्र उन बातों का छेड़ा उसने।
जिनसे अपने संग मेरी भी शाम बना गया।।
मेरी टीशर्ट देखकर यार अपनी समझ बैठा।
सुरूर कम न था उतरा कर अपना बना गया।।
इतना सुकून मिला कि नींद में आँखें बोझिल।
सोई जरूर 'उपदेश' मगर ख्वाब बना गया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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