कविता : अर्थ और व्यर्थ....
जो कल बच्चे थे
आज बड़े हो गए
अपने पैरों पर
वे खड़े हो गए
अब उनके मां
बाप बूढ़े हैं
वे बेचारे बिस्तर
पर पड़े हैं
बच्चे खुद के काम
पर व्यस्थ हैं
वे अपने आप
में मस्त हैं
अपने मां बाप के बारे में
कुछ सोचते भी नहीं
उन्हें खाना खाने के लिए
कभी पूछते भी नहीं
फिर मां बाप ने बच्चों को
पालने का क्या अर्थ है ?
बुजुर्ग अवस्था दयनीय हो तो
बच्चे पालना ही व्यर्थ है
बुजुर्ग अवस्था दयनीय हो तो
बच्चे पालना ही व्यर्थ है.......
netra prasad gautam


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







