कवि बनना आसान नहीं है
बरसों बीत गए ओ साथी,
मिली कहाँ पहचान अभी है।
कहाँ न जाकर माथा टेका
ईश्वर मेहरवान नहीं हैं।
कवि बनना आसान नहीं है।
कागज पर घिस-घिसकर प्यारे,
टूट गई कितनी अवलेखा।
दिनभर कैद पड़े कमरे में,
कई दिवस नहीं सूरज देखा।
श्रीमती की डांटे खाई,
फाड़-फाड़कर कागज फेंका।
मिला नहीं जब शब्द सूटेबल,
पहुँच गए हम जाकर ठेका।
फिर भी शब्द मिला नहीं साथी,
न समझो आसान इसे है।
सीधे गटक लिए ग्रीवा में,
यह कोई रसपान नहीं है।
कवि बनना आसान नहीं है।
कभी खगड़िया,करियन,भिरहा,
मिर्जापुर जा छंद सुनाया।
बिना पांव के दौड़ लगा दी,
जब भी कभी बुलावा आया।
काम-धाम सब धरे रह गए,
रुपया-पैसा बहुत लगाया।
छूटी जब तब ट्रेन हमारी,
बैठ वहीं फिर रात बिताया।
इतना भी करने पर देखो,
अधरों पर मुस्कान नहीं है।
किचन में बहुतेरे डिब्बे
पर उसमें सामान नहीं है।
कवि बनना आसान नहीं है।।
पंकज पांडेय, रोसड़ा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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