कत्ल हुआ हैं तो चीखे भी निकलनी चाहिए
गुनहगार हैं तो फिर सज़ा भी मिलनी चाहिए
रहा नहीं जाता ज़ब वो नितरने में देर लगाए
चाय ज़ब छने तो छलनी से ही छननी चाहिए
कहीं यूँ न हो मैं क़रीब आऊँ तू बेक़रार न हो
मिलन की साज़ में साँसे भी बहकनी चाहिए
काश बन-संवर तू तैयार हो और आईना देखे
सूरत देखे तो आईने की कोरे चटकनी चाहिए
इश्क़ की ज़िद में अपना सब गँवा बैठे कृष्णा
ज़िस्म ख़ाक हुआ तो रूह भी निकलनी चाहिए..
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







