पीर बढ़ी मन में कलम को कसकर जकड़ा।
शब्द शब्द सीढ़ी चढ़कर मुक्ति द्वार पकड़ा।।
हर लम्हा रिस रहा बूँद बूँद बनकर प्रियतम।
तुम्हारे रहते हुए भी मुझे बेताबियों ने जकड़ा।।
गुज़रने वाला लम्हा ठिठका खड़ा देखता रहा।
मौसम को आहत करती तन्हाइयों ने जकड़ा।।
अपनी व्यथा के संकोच से मुक्त ख्यालो में।
उन्मुक्त सी देह से आती शहनाइयों ने जकड़ा।।
तन मन की चारदीवारी महक उठी 'उपदेश'।
पसीजती हथेलियों को परछाईयों ने जकड़ा।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







