कल तलक था चेहरा कहाँ वो आज है यारो
बदलता जा रहा जिन्दगी का अंदाज है यारो
बून्द सीपी में गिरी और बन गई मोती कोई
जो घास में शबनम बनी वही उदास है यारो
ज़ब जुदा होना ही है तो क्या करें मिलके उसे
कुछ नहीं सकते उसे वो मेहमाँ खास है यारो
कल तलक खाना खराब वो आज हैं शहंशाह
कब कहाँ क्या होगा किसे ये आभास है यारो
मैं मुक़ददर पढ़ रहा था हाथ के नक़्शे में ज़ब
कितना गहरा दे गया वो दिल का दाग है यारो
जब वफ़ा का नाम तक लेना यहाँ पर जुर्म है
खास मुजरिम आपका ये बस दास है यारो! !


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







