रचना के लिए रचना छोड़ देना,
रचना की बिरादरी नहीं।
इंसान को दर्द मिला है,
रचना को नहीं,
इसलिए वो तराशने पर आ जाती है।
कागज पर लिख तो देता हूं, मुझे छोड़कर।
बातें करता हूं, छूट जाती है मुलाकातें,
फिर खुद को कहता हूं, मैं भी गरीब हूं।
पागल कौन होता है, वो तो रोज़ होता है,
खुद को कयामत करना पड़ता है
सांसें लेता हूं फिर छूट जाती है,
किसी के रहने से कोई जगह थोड़ी हो जाती है।
दर्द क्या है, खाली करता जादू।
पाँव रखूं बाहर, तो करना क्या था भीतर,
बाहर ही इश्क़ है तो मरना था क्या भीतर
हम वही थे, बदला क्या,
तुमने बस बदलना चाहा।
आँसू रखे कहाँ आँखों में,
जहाँ से तुम्हें देख रहे थे,
गिराने को भी यही जगह मिली थी।
हमने तो अपनी बात की,
तुमने पूछा क्या है, तुम्हें तो सुनना पड़ता है,
हमने तो कहा है, ये गुनाह नहीं तो क्या है।
जान से कहे कि जान ले लो,
जान निकल कर कहे,
इतनी भी जान नहीं रखते।
खुद जाकर खुद को बताया,
अपने पास सवाल के अलावा, बचा क्या है,
खुद को सवाल फिर क्यों।
मेरी शवयात्रा में मुझे जिंदा रखना,
मैं तुम्हें रोने की मोहलत दे दूंगा,
तुम्हारे साथ मेरे भी कंधे पर भी मेरा भार रख देना,
मेरे शोर में तुम्हारे आंसू को किराया दे दूंगा,
मेरे जलने में भी ठंड रख देना,
मैं अपनी तड़प दे दूंगा।
आँखों में आँसू है,
मैं रोऊं तो इसमें दिल क्या करे,
मोहब्बत हुईं, आशिक भी मैं ही बनूं,
इसमें दर्द क्या करें।
ये क्या तसल्ली है,
सारे दिन तमाशा करके,
सारे तमाशे को होता देखूं।
थोड़ी देर की बात है फिर थोड़ी देर आने दो।
इश्क़ मुझमें हुआ,
तुमसे किया, तुममें हुआ,
तुमने किया,
इश्क़, इश्क़ रह गया।
अगर हाथ में हाथ रखते हो,
तो साथ का क्या करोगे,
या तो हम रहे, या साथ रहे,
जिंदगी पर रखें हाथ रहे,
तो क्या रहे, जो हो रहा है।
मरने तो लगे थे फिर मरना छूट गया,
मिलने की तड़प में महीना छूट गया।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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