कागज़, तुम कितने प्यारे दोस्त हो,
तुम कितने अच्छे साथी हो,
मन में उठते भावों को,
शब्दों में सजाने वाले,
मेरे हर अनकहे दर्द को,
बिन बोले समझने वाले।
मैं मन का दर्द कलम के ज़रिये,
तुम पर लिखती रहती हूँ,
कभी आँसू, कभी मुस्कान,
हर एहसास उकेरती रहती हूँ।
ना शिकवा है, ना शिकायत है,
चुपचाप सब सहते रहते हो,
मेरे मन की गहरी पीड़ा को,
अपने सीने में रखते हो।
जब दुनिया मेरी सुनती नहीं,
तुम मौन होकर सुनते हो,
मेरे बिखरे हुए जज़्बातों को,
शब्दों में पिरोते रहते हो।
एक तुम ही सच्चे साथी हो,
हर दुख-सुख मेरा समझते हो,
मेरे मन के सूने आँगन में,
भावों के दीप जलाते हो।
कागज़, तुम निर्जीव नहीं,
मेरे मन का एहसास हो,
मेरे शब्दों में बसते हो,
तुम ही मेरे सबसे ख़ास हो।
— सरिता पाठक
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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