Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

इक़बाल सिंह ‘राशा’ की कविता “मेरे होने की खोट”

मैंने तुझे
बहुत भीतर से चाहा था—
इतना पास
कि तेरी धड़कन
मेरी चुप्पी का हिस्सा बन गई।

फिर भी
हमारे बीच कुछ था।
न कोई दीवार,
न कोई दूरी,
न कोई दूसरा—
बस मैं।

तू हर बार
मेरे भीतर उतरता रहा,
और मैं
हर बार तुझे
अपना कहकर
तुझसे थोड़ा और
दूर होता गया।

मैंने तेरे आगे
सिर झुका दिया,
पर अपना ‘मैं’
तेरे चरणों में
न रख सका।

वह मेरी मुट्ठी में
नाख़ून-सा
गड़ा रहा,
और मैं चुपचाप
अपने ही ख़ून का
स्वाद पीता रहा।

अब समझ आया है—
मिलन में बाधा
कोई विरह नहीं होता,
प्रेमी का ‘होना’ होता है।

तू मेरे भीतर
कभी आया ही नहीं—
क्योंकि मैं ही
अपने होने की देहरी पर
ताले की तरह
लटका रहा।

अब जब तू पुकारे,
तो मेरा नाम मत लेना—
नाम लेते ही
मैं लौट आता हूँ।

बस अपनी ख़ामोशी भेज देना,
मैं उसे पहचान लूँगा।

और जिस दिन
तेरी ख़ामोशी में भी
मेरा कोई निशान न बचे—
समझना,
उस दिन
तेरे और मेरे बीच
मैं नहीं रहा।

शायद उसी दिन
प्रेम पूरा होगा—
जब तू रहेगा,
और तुझे चाहने वाला
कोई
मैं नहीं।

— इक़बाल सिंह ‘राशा’
मनिफिट, जमशेदपुर, झारखण्ड




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (2)

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मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

सुपर से भी ऊपर!! राशा जी, आपकी कलम से आत्मा की आवाज स्याही बनकर काग़ज पर उतरती है। जहाँ प्रेम की सीमा शुरू होती है वहीं से "मैं" की महत्ता खतम हो जाती है। अति सारगर्भित कविता। काफी दिनों बाद आपकी रचना पढ़ने को मिली, मन गदगद हो गया। आप स्वस्थ रहे, मस्त रहें! सादर प्रणाम!!

सुप्रिया साहू said

वाह वाह....प्रेम में मैं का कितना महत्व है, जब प्रेम करने के लिए प्रेमी ही न रहे थे वो प्रेम कैसा, चाहे हम उसके कितने ही करीब रहे अगर उसमें थोड़ा सा भी प्रेम नहीं तो ये प्रेम व्यर्थ हैं क्योंकि इसमें खुशियां कम तकलीफें ज्यादा होगी, बहुत खूबसूरत रचना सर 👌👌, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

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