शिखर पर पहुँच कर खुशी जाती रही।
चरित्र ने बौना बनाया इज़्ज़त जाती रही।।
ऊँचाई पर टिके रहना किस्मत में न था।
बुराईयों के बीच फंसकर चैन जाती रही।।
अंहकार ईर्ष्या क्रोध और छल- कपट से।
बनाई विश्व गुरू की पदवी भी जाती रही।।
अपना मन बुराईयों से ऊपर उठ ना पाया।
जग को जीतने की अभिलाषा जाती रही।।
दंद-फंद से दौलत जोड़ी हवा में घूमे फिरे।
लम्बे-लम्बे 'उपदेश' मन की बात जाती रही।।
अपने भीतर झाँक लेते अगर शिक्षित होते।
भँवर में फंसकर गरीबो की हाय खाती रही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







