"तन्हाई जब मेरे पास आती है तो पहले मुझे तन्हां पाती है,
गरीबी जब मेरे पास आती है तो पहले ही मुझे गरीब पाती है,
नसीब जब मेरे नसीब में आता है तो मेरे सिवा उसे कोई नज़र नहीं आता है,
आँसू जब मेरे निकल आते हैं तो पहले ही सूख जाते हैं,
साँसे जब जिंदगी बन के आती है मेरे सिवा जिंदगी भी उसे कंकड़ नज़र आती है,
नींदें जब मेरी बाहों को समेटने आते हैं, सपने ही मुझे भूल जाते हैं,
कागज पर में जब कुछ लिखता हूं, कागज ही गल जाते हैं,
संसार में जब आया था, फिर से कोने में संसार बनाने लग जाते हैं,
काम कोई भी करने लग जाते हैं, फिर औरों सुकून देने लग जाते हैं,
खुद से कितना वाकिफ हूं, यहीं मुँह पे ताले लग जाते हैं,
थोड़े ही टुकड़े जोड़ा था, वहीं मासूम पत्थर गिरने लग जाते हैं,
खत्म होने लगा जब सारे चेहरे ये चेहरा जलाने लग जाते हैं,
जीते भी हो क्या, जगह जगह जीने की वजह बताने लग जाते हैं,
एक अपना कुछ पाने को यहां, एक धड़कन क्यों ना, ना जाने कितने जहां कितने ज़माने कितने इंसान लग जाते हैं।।" -
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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