एक दिन चले जाएंगे
एक दिन दुनिया से दूर चले जाएंगे,
सच है कि बनकर नूर चले जाएंगे।
आज लड़ते हैं, एक-दूजे के विरोध में,
एक दिन होकर मजबूर चले जाएंगे।
दिया है ईश्वर ने बहुत कुछ हमें, दोस्त !
लेकर साथ में प्यार ज़रूर चले जाएंगे।
ईमानदारी का चिराग लेकर निकले हैं हम,
ग़म के बादल हटाकर दूर चले जाएंगे।
मौत आती है, आने दो, डर किस बात का,
इस जहाँ से हँसते-हँसते, हुज़ूर चले जाएंगे।
मत कहो बालकों से, “तुम आलसी हो” कभी,
वो शिवबा-से बनकर शूर चले जाएंगे।
घर की बहू-बेटियों को भुला बैठे हैं ये,
पहाड़ की देवी ढूँढ़ने दूर चले जाएंगे।
ज़माना बड़ा ख़राब है, सँभलकर रहो,
वरना चोर भी बनकर मशहूर चले जाएंगे।
जो मिला है ज़िंदगी में यार से धन्यकुमार !
याद बनकर एक दिन ज़रूर चले जाएंगे।
धन्यकुमार जिनपाल बिराजदार, सोलापुर, महाराष्ट्र
9423330737


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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