"दिल की दास्ता"
लिखूंगी मैं अपना दर्द,
तुम उसे महसूस करोगे क्या ?
कभी मेरी कलम में खुशियों की ,
रंगीन स्याही भरोगे क्या ?
बिखेरूँगी मैं अपनी आंसु,
तुम उसे समझोगे क्या?
लिखूंगी मैं अपनी हाल ए दिल,
तुम महसूस करोगे क्या?
कभी मेरी आँखों में,
सपने नील गगन भरोगे क्या ?
कभी मेरे दिल में खुशियों की,
बारिश भरोगे क्या ?
कभी मेरी ज़िंदगी में,
प्यार की रोशनी भरोगे क्या ?
अभी तो अंजान हो,
तुम मेरे इस दिल की पुकार से,
पर कभी पता चला तुम्हें,
तो मेरा होके सुनोगे क्या ?
बयां करती हूँ अपनी दिल ,
की दास्तां अपनी रचनाओं में
तुम उसे दिल से लगाओगे क्या ?
कभी मेरी इस जिंदगी को,
जानोगे क्या ?
अभी तो अंजान हो,
तुम मेरी भावनाओं के बारे में,
पर कभी समझ आया तुम्हें,
तो मुझे पहचानोंगे क्या ?
कभी मेरे शब्दों में छुपी,
आँसुओं की कहानी पढ़ोगे क्या ?
कभी मेरी आँखों में दर्द की,
गहराई देखोगे क्या ?
कभी मेरे दिल की धड़कनों में,
प्यार की आवाज़ सुनोगे क्या ?
कभी मेरी ज़िंदगी में,
खुशियों की रोशनी भरोगे क्या ?
जब मैं मायूस या दु:खित हो जाऊं,
तो तुम समझोगे क्या ?
कभी मेरी आँखों में आँसुओं की,
कहानी पढ़ोगे क्या ?
जब मैं अकेली महसूस करूं ,
तो साथ दोगे क्या ?
कभी मेरे दिल की धड़कनों में ,
दर्द की आवाज़ सुनोगे क्या ?
जब मैं खुशियों से दूर हो जाऊं,
तो समझोगे क्या ?
कभी मेरी ज़िंदगी में ,
खुशियों की रोशनी भरोगे क्या ?
रचनाकार-पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार )


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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