चांदनी रात मे तन्हा ताकती हूँ चाँद को,
और पूछती हूँ चाँद से, तुमने देखा है कंही मेरे प्रियतम को,
फिर खो जाती हूँ, उनकी यादों मे,
डूबती जाती हूँ अतीत की गहराइयों मे।
कभी हँसती हूँ तुम्हें याद करके,
कभी रो जाती हूँ तुम्हारी याद मे।
चाँदनी रात मे तन्हा ताकती हूँ चाँद को,
और पूछती हूँ उससे,
तुम बिखराते तो होंगे अपनी चाँदनी उनके भी आँगन मे,
वो खो गये हैं कंही ज़माने की भीड़ मे,
तुम्हें वो मिल जायें कंही तो दे देना मेरा संदेशा —
उनसे कहना कि मेरी साँसे उन्हें याद करती हैं,
और आँखे उनकी राह तका करती हैं।
उनसे कहना आखिरी सांस के टूटने से पहले वो आ जायें यदि,
मेरी पथराई आँखे सुकून पा जायें तभी,
उनका दीदार कर हम चैन से सदा के लिये सो जायें तभी।
चांदनी रात मे तन्हा ताकती हूँ चाँद को,
पूछती हूँ उससे अपने प्रियतम का पता
— सरिता पाठक
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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