तबियत कुछ कहती मगर बंदिशें रोकती।
आवाज सुनने को मिलती आँखें तरसती।।
बिखर जाएगी कहीं सँभालने वाला होता।
दूरियों को सोचकर दिन रात आहें भरती।।
तुम्हारे पास सहारे होंगे मेरे सिवा और भी।
मेरा दिल संभलता नही तुम्हारा दम भरती।।
लगाव आज भी ज़िन्दा शिकायत के लिए।
सुनोगे कब 'उपदेश' अँधेरे में आँसू भरती।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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