बलिया वीरों की धरती
रही नहीं कभी यह परती
इसे जानता जहान है
इसे पहचानता जहान है
चमकी चम चम तलवारें
१९५७ में,हम अंग्रेजों को मारे
मंगल पांडे का जग में नाम है
१९४२ में पहले
आजादी से पहले
वीरता के हम किए कई काम हैं
सबसे पहले आजाद हुए हम
सबसे पहले आबाद हुए हम
चित्तु पांडे का नाम है
यहां बहता रक्त नहीं,बहता स्वाभिमान है
नस नस में है जोश जानता जहान है
जब बागी बलिया बोले
दिल्ली का सिंहासन डोले
हम अंग्रेजों को तलवारों पे तोले
राजा बलि की धरती यह,यहां भृगु स्थान है
राजा कुंवर की धरती यह,हमसे हिलता आसमान है
बलिया का दिनकर
"सहज कुमार" हैं
बैरिया का दिनकर
करता जग से प्यार है
बलिया वाले हैं हम, पाते प्रथम स्थान हैं
डर का नहीं कहीं हमारे हृदय में स्थान है
स्वर्ग से ऊंचा हमारा स्वाभिमान है
हैं हमारे पांव धरती पर, करों से छूते हम आसमान हैं
प्रकृति सुंदरी करती यहां नित स्नान है
यहां खेत खलिहान हैं
यह गंगा का मैदान है
है यह वही बलिया जहां गूंजते अजान हैं
है यह वही बलिया जहां गूंजते सहज के गौरव गान है।
गुदरी सिंह के टोला, पांडे पुर, बैरिया, बलिया, उत्तरप्रदेश


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







