अपने “मैं”को हम में बदल लीजिए
थोड़ा ही सही
नज़रिए की अपने बदल लीजिए।
थोड़ा सा ही सही
दूसरे के नज़रिए को भी अपना लीजिए।
ज़िन्दगी यूँ ही नहीं उलझती,
“मैं”के जुनून से ही बिखरती है।
हम और तुम को भी अपना लीजिए,
कुछ परिश्रम किए बिना ही निखर जाएगी !!
वन्दना सूद
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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