खिड़की से आती धूप अब भी वही।
गर्माहट बढ़ती सी महसूस होती रही।।
वक्त चढ़ता गया खुद की ऊँचाई पर।
इंतजार में बेज़ान खुशी चहकती रही।।
आहट होने पर दिल की धड़कन बढ़ी।
रंग और निखर आया पीली होती रही।।
अनकही बाते साँसे भरती पकडी गई।
घर में सौंधी खुशबू हर ओर बहती रही।।
खामोशी के दौर में प्रवेश करती हवाएँ।
अंजुमन की घड़ी 'उपदेश' सहती रही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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