अक्षरा रामायण
समय संग्रह कर रहा, मेल और अनमेल,
दुर्भर मिलन चलता रहा परिवार जन में प्रेम,
दोस्त व शत्रु का तब जन्म हुआ,
राजकता और अराजकता का खेल,
शह-मात से तय हुआ पाप-पुण्य और परिवेश,
सत्य-असत्य के बीच में नारी की दशा थी खेल,
भार रहा उस भोले जन पर,
जो देता रहा जीवन, समर्पण और स्नेह,
अराजकता का विनाश कर,
विवेक, विनय, सहनशील—एक ही नाम ने,
अपने आपको चरित्र बनाकर,
सबके हृदय में पाया मोक्ष का निर्विवाद प्रवेश,
मैं बस इतना जाना—एक अक्षर का था खेल,
अ से अनंत रहन-सहन करने वाला,
अ से कर गया अंत।
— ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







