प्रथम स्वर्ण- किरण से
श्वेत कमल पंखुड़ी में
तुम्हारा नाम लिखूं, और
मणि -ओंस कणों से सजाऊं,
धवल -नवल चंद्र- आभा की
शीतल महीन चादर बन ,
अष्टमी की उज्ज्वल निशा में
तुम्हें,नखशीश ढंक जाऊं,
पुष्प -पलाश की लाली लाली
मखमली चूनर बन ओढ़ाऊं,
तुम्हारे मन-वनक्षेत्र को
प्रीत -घट-सुरभि से नहलाऊं,
भ्रमर -गीत -गुंजन की
छेड़ - छेड़ प्रीत - राग
कानों में जा जाकर
बार बार सुनाऊं,
बौराए आम्र -तरु की
घनी - घनी डाली बीच
नाचती कोयल की
कंठ में बैठ जाऊं,
मन पर तुम्हारे,राज
करूं बनके, ऋतुराज
इस जनम की प्रीत - रीत
ऐसे ही निभाऊं।।
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







