"प्रेम गीत (कविता)"
मधुर, श्रृंगार रस से सजे
मन को मोहित करते हैं
मिठास भरे ये,
प्रेम गीत
हृदय की आवाज़,
नयन को सम्मोहित करते हैं
प्यारे ये, प्रेम गीत।
वेदना का अंत,
खिले प्रेम के फूल
चहुंओर बिखरा प्रेम ही प्रेम
मिटे, नफ़रत के शूल।
अधरों पर सजे,
मोहन की मुरली पर बजे
सुरीले प्रेम गीत
हर बाला, राधा बन जाती
सुनकर, सजीले प्रेम गीत।
कोने कोने में,
प्रेम वर्षा हो रही
आसमां इसका है, गवाह
चांद की चांदनी भी लजा रही
ऐसा है, प्रेम गीत
का प्रवाह।
राग-ए- इश्क से,
रुह हो रही सराबोर
नग़मे, मोहब्बत से है तर,
कि बीत गई रात्रि, हो गई भोर।
पाषाण दिल को, पिघला देता है
जुदा दिल को, मिला देता है
ये प्रेम भरे गीत की
ताकत ही है, जो
विरह जैसे रेगिस्तान में भी
एक फूल, सुंदर सा
खिला देता है ।
रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार )✍️


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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