लोकदेवता बाबा रामदेव जी महाराज (रामसापीर) मेघवाल समाज में जन्म हुआ
रचनाकार: बालकवि हिमांशु दत्त 795
मरुधरा राजस्थान की पावन रेत पर अनेक ऐसे महापुरुषों ने जन्म लिया जिन्होंने मानवता, समानता और सेवा का संदेश दिया। उन्हीं महान लोकदेवताओं में सबसे पूजनीय नाम है बाबा रामदेव जी महाराज, जिन्हें प्रेम से रामसापीर भी कहा जाता है। वे केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में श्रद्धा और आस्था के प्रतीक हैं। हिंदू उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का अवतार मानते हैं, जबकि अनेक मुस्लिम श्रद्धालु उन्हें रामसापीर के रूप में सम्मान देते हैं। यही कारण है कि बाबा रामदेव जी सांप्रदायिक सद्भाव और मानव एकता के अमर प्रतीक हैं।
बाबा रामदेव जी का जन्म राजस्थान के जैसलमेर क्षेत्र के रूणिचा (वर्तमान रामदेवरा) में हुआ। बचपन से ही उनमें अद्भुत तेज, करुणा और दिव्यता दिखाई देती थी। उन्होंने जाति, धर्म, ऊँच-नीच और भेदभाव का विरोध किया तथा समाज के गरीब, शोषित और पीड़ित लोगों को सम्मान से जीने की प्रेरणा दी। उनका जीवन सेवा, त्याग और परोपकार का अनुपम उदाहरण है।
लोककथाओं में वर्णित है कि बाबा रामदेव जी ने अनेक चमत्कार किए, लेकिन उनका सबसे बड़ा चमत्कार लोगों के हृदय में प्रेम, विश्वास और समानता की ज्योति जलाना था। उन्होंने सिखाया कि ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग किसी जाति या धर्म से नहीं, बल्कि सत्य, सेवा, प्रेम और अच्छे कर्मों से होकर जाता है।
हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष में रामदेवरा में विशाल मेला लगता है, जहाँ देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने आते हैं। लोग पैदल यात्रा करते हैं, भजन गाते हैं और बाबा के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। वहाँ का वातावरण भक्ति, प्रेम और भाईचारे से भर जाता है।
आज के समय में भी बाबा रामदेव जी की शिक्षाएँ उतनी ही प्रासंगिक हैं। जब समाज में विभाजन, स्वार्थ और भेदभाव देखने को मिलता है, तब उनका संदेश हमें याद दिलाता है कि सभी मनुष्य समान हैं और सच्चा धर्म मानव सेवा है। हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेकर सत्य बोलना, दूसरों की सहायता करना, बुजुर्गों का सम्मान करना और समाज में प्रेम फैलाना चाहिए।
आओ प्रण करें—
हम बाबा रामदेव जी महाराज के आदर्शों पर चलेंगे,
मानवता की सेवा करेंगे,
जाति-धर्म से ऊपर उठकर सभी का सम्मान करेंगे,
और प्रेम, सत्य तथा सद्भाव का दीप सदैव जलाए रखेंगे।
जय बाबा रामदेव जी महाराज! जय रामसापीर!


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