(बाल कविता)
बोलो कितनी हैं छेरी
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पाँच बकरियाँ खातीं घास ।
दस का रहता है उपवास ।।
पन्द्रह दें सबको उपदेश ।
बीस बकरियाँ बदलें वेश ।।
काले रंग की हैं पच्चीस ।
लाल बकरियाँ पूरी तीस ।।
भूरी कबरी हैं पैंतीस ।
श्वेत बकरियाँ हैं चालीस ।।
पैंतालिस रहतीं नाराज़ ।
बस पचास का चलता राज ।।
बोलो कितनी हैं छेरी ।
दो सौ पचहत्तर मेरी ।।
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~राम नरेश 'उज्ज्वल'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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