हिंदी एवं हरियाणवी साहित्य के समकालीन रचनाकार | कवि | कथाकार | साहित्यिक संपादक
सुरेन्द्र कल्याण बुटाना 
सुरेन्द्र कल्याण बुटाना, जिन्हें साहित्यिक जगत में सुरेन्द्र कल्याण के नाम से भी जाना जाता है, समकालीन हिंदी एवं हरियाणवी साहित्य के सक्रिय और बहुआयामी रचनाकार हैं। कविता, कहानी, लघुकथा, सामाजिक लेखन तथा मानवीय संवेदनाओं पर आधारित साहित्य उनकी प्रमुख पहचान है। उनकी लेखनी का केंद्र मनुष्य, समाज, ग्रामीण जीवन, प्रेम, विरह, परिवार, प्रकृति, समय, श्रम, स्मृतियाँ और बदलते सामाजिक मूल्य हैं।
हरियाणा के करनाल ज़िले के ग्राम बुटाना से संबंध रखने वाले सुरेन्द्र कल्याण बुटाना साहित्य को केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और मनुष्य के बीच संवाद का सशक्त माध्यम मानते हैं। उनकी रचनाओं में भाषा की सरलता, विचारों की गहराई और मानवीय संवेदनाओं का संतुलित समावेश दिखाई देता है।
उनकी साहित्यिक मान्यता उनकी दो चर्चित पंक्तियों में स्पष्ट दिखाई देती है—
"कलम जब ताकत बन जाए, तब कलम भविष्य लिखती है।"
और
"कलम ही धर्म, कलम ही कर्म।"
ये दोनों पंक्तियाँ उनके लेखकीय व्यक्तित्व और साहित्य-दर्शन का प्रतिनिधित्व करती हैं।
साहित्यिक यात्रा
सुरेन्द्र कल्याण ने अपने साहित्यिक जीवन की शुरुआत कविता और लघु लेखन से की। प्रारंभिक दौर से ही उनका झुकाव मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक यथार्थ और जीवन के सूक्ष्म अनुभवों की ओर रहा। समय के साथ उनकी लेखनी ने कविता, कहानी और सामाजिक विषयों पर परिपक्व अभिव्यक्ति प्राप्त की।
उनकी रचनाओं में गाँव और शहर, परंपरा और आधुनिकता, संघर्ष और आशा, प्रेम और विरह, स्मृति और भविष्य—इन सभी का संतुलित चित्रण मिलता है। यही कारण है कि सुरेन्द्र कल्याण बुटाना की रचनाएँ केवल साहित्यिक नहीं, बल्कि मानवीय दस्तावेज़ के रूप में भी देखी जाती हैं।
प्रकाशित पुस्तकें
सुरेन्द्र कल्याण बुटाना की प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ—
- प्रतिज्ञा दोस्ताना (गज़ब दोस्ताना) — हिंदी कहानी कृति
- समाज — हरियाणवी कविता संग्रह
- 100% Guarantee Crack Exam English Paper 2: UGC NET/JRF English (High Probability Master Set) — परीक्षा-उन्मुख शैक्षिक पुस्तक, जो उनके साहित्यिक लेखन के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र में उनकी सक्रियता को भी दर्शाती है।
प्रमुख साहित्यिक प्रकाशन
सुरेन्द्र कल्याण की रचनाएँ अनेक साहित्यिक मंचों एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
- लिखन्तु डॉट कॉम
- अमर उजाला काव्य
- रचनाकार
- साहित्य कुंज
- हमारी वाणी
- सारा सच
- प्रतिबिंब मीडिया
- हिंदी कविता
- बहुजन पत्रिका
- हिंदी रक्षक
- साहित्य अमृत
- दैनिक साहित्य
इन मंचों पर निरंतर प्रकाशित होने से सुरेन्द्र कल्याण बुटाना की साहित्यिक उपस्थिति व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँची है।
साहित्यिक दायित्व
इन भूमिकाओं के माध्यम से सुरेन्द्र कल्याण बुटाना केवल रचनाकार ही नहीं, बल्कि साहित्यिक गतिविधियों के सक्रिय सहयोगी के रूप में भी योगदान दे रहे हैं।
मंचीय सहभागिता
सुरेन्द्र कल्याण बुटाना ने हरियाणा एवं अन्य साहित्यिक मंचों पर विभिन्न काव्य-पाठ, साहित्यिक गोष्ठियों और कवि सम्मेलनों में सहभागिता की है। उनकी प्रस्तुतियाँ संवेदनशील विषयों और सहज अभिव्यक्ति के कारण श्रोताओं द्वारा सराही जाती रही हैं।
लेखन की प्रमुख विषय-वस्तु
लेखन शैली
सुरेन्द्र कल्याण बुटाना की शैली सरल, संप्रेषणीय और भावप्रधान है। वे अनावश्यक भाषिक आडंबर से बचते हुए जीवन के वास्तविक अनुभवों को साहित्यिक गरिमा के साथ प्रस्तुत करते हैं। उनकी कविताएँ पाठक को केवल भावुक नहीं करतीं, बल्कि आत्मचिंतन के लिए भी प्रेरित करती हैं।
साहित्य-दर्शन
सुरेन्द्र कल्याण बुटाना का विश्वास है कि साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में संवेदना, विचार और नैतिक चेतना का विस्तार करना भी है। वे मानते हैं कि लेखन तभी सार्थक है जब वह मनुष्य को मनुष्य के अधिक निकट लाए।
सुरेन्द्र कल्याण बुटाना
पता - गाँव बुटाना, तहसील निलोखेरी,
जिला करनाल, हरियाणा 132117
सुरेन्द्र कल्याण बुटाना 


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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