आधुनिक मीरा और छायावाद की शक्ति कवयित्री महादेवी वर्मा
महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य के 'छायावादी युग' के चार स्तंभों में से एक है। उन्हें 'आधुनिक मीरा' के नाम से जाना जाता है क्योंकि उनकी कविताओं में विरह, वेदना और भक्ति की गहरी अनुभूति मिलती है।
जन्म, शिक्षा और कार्य:-
महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च, 1907 को फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ और उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए. किया। वे प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्या और बाद में कुलपति रहीं, जहाँ उन्होंने महिला शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।
उन्होंने प्रसिद्ध महिला पत्रिका 'चाँद' का संपादन भी किया।
पुरस्कार:-
1.ज्ञानपीठ पुरस्कार (1982): 'यामा' काव्य संकलन के लिए।
2.पद्म विभूषण (1988): मरणोपरांत।
3.पद्म भूषण (1956):।
4.साहित्य अकादमी फेलोशिप (1979):यह सम्मान पाने वाली पहली महिला।
प्रमुख काव्य कृतियाँ:-
1.नीहार (1930): उनका प्रथम कविता संग्रह।
2.रश्मि (1932):।
3.नीरजा (1934):जिसके लिए उन्हें 'सक्सेरिया पुरस्कार' मिला।
4.सांध्यगीत (1936):।
5.दीपशिखा (1942):।
6.यामा (1939): उनके महत्वपूर्ण काव्य संग्रहों का संकलन।
7.अग्निरेखा (1990): मरणोपरांत प्रकाशित।
प्रसिद्ध कविताएँ/गीत:
1.मैं नीर भरी दुख की बदली: यह उनकी सबसे प्रसिद्ध कविताओं में से एक है।
2.बीन भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ:।
3.फिर विकल हैं प्राण मेरे:।
4.जो तुम आ जाते एक बार:।
5.मुरझाया फूल:।
कविता के अलावा उन्होंने उत्कृष्ट रेखाचित्र और संस्मरण भी लिखे है:-
1.अतीत के चलचित्र:।
2.स्मृति की रेखाएँ:।
3.पथ के साथी:।
4.मेरा परिवार: (पशु-पक्षियों पर आधारित)।
5.श्रृंखला की कड़ियाँ: (स्त्री विमर्श पर आधारित निबंध)।
प्रस्तुत है महादेवी वर्मा की एक प्रसिद्ध कविता
"जो तुम आ जाते एक बार"
जो तुम आ जाते एक बार!
कितनी करुणा कितने संदेश
पथ में बिछ जाते बन पराग;
गाता प्राणों का तार-तार
अनुराग भरा उन्माद राग;
आँसू लेते वे पद पखार!
हँस उठते पल में आर्द्र नयन
धुल जाता ओंठों से विषाद,
छा जाता जीवन में वसंत
लुट जाता चिर संचित विराग,
आँखें देती सर्वस्व वार!
Article by
Admin - Reena Kumari Prajapat 


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







