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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

"औरत की ताकत"

"औरत की ताकत"

अगर पानी है कामयाबी,
तो बहुत कुछ त्याग करना पड़ता है, कच्ची उम्र की अपनी ख्वाहिशों का, बलिदान करना पड़ता है।

टिकानी पड़ती है नज़र अपने लक्ष्य पर,
हिम्मत और हौसलों से हर मुश्किल को पार करना पड़ता है।
तोड़नी पड़ती हैं अंधविश्वास और गुलामी की ज़ंजीरें,
अपने अधिकारों के लिए लड़ना पड़ता है।

कभी-कभी करना पड़ता है खुद को कुर्बान,
मिटाकर खुद को अपने मकसद के लिए,
एक नया इतिहास बनाना पड़ता है।
कब तक अंधविश्वास में खुद को यूँ ही मिटाती रहेगी?
खाकर ज़माने की ठोकरें, जुल्म और अत्याचार सहती रहेगी?

कोई नहीं आएगा तुझे बचाने ,
कब तक इस भ्रम में अपनी हस्ती खोती रहेगी?
अपने सम्मान के लिए,
तुझे खुद ही आगे आना पड़ेगा। अपनी हिम्मत और ताकत का एहसास ज़माने को कराना पड़ेगा।

ज़िंदा हो अगर, तो ज़माने को ज़िंदा होने का एहसास कराना पड़ेगा।
कब तक यूँ ही सहती रहोगी,
जुल्म, अत्याचार और बलात्कार को?
इन सब को जड़ से मिटाना पड़ेगा ।

अब और इंतज़ार नहीं!
उठ, आवाज़ उठा, हिम्मत दिखा, अपनी इज़्ज़त और सम्मान,
तुझे खुद ही बचाना पड़ेगा।

तुझमें जो है ताकत और हिम्मत , उसका एहसास, ज़माने को कराना पड़ेगा।
लड़कर दुनिया के ज़ालिमों से,
खुद को बचाना पड़ेगा,
अपनी काबिलियत के दम पर,
खुद को सम्मान दिलाना पड़ेगा।

न तू अबला है,
न कमजोर,
तू खुद में एक शक्ति है, एक दौर है, जो इतिहास बदलने का,
हौंसला रखती है।

मत मिटा खुद को,
अंधविश्वास और अज्ञान की भट्टी में, तू कोई साधारण नहीं,
एक शक्ति है इस सृष्टि में।

तू झाँसी की रानी की वीरता रखती है,
माता सावित्रीबाई की शिक्षा और जागृति की ज्योति जलाती है,
माता रामबाई जैसी दृढ़ता और साहस से,
हक़ और इंसाफ़ दिलाने की ताकत रखती है।

फूलन देवी की तरह ,
जुल्म और अत्याचार के खिलाफ़ लड़कर,
ज़ालिमों को टकराने की हिम्मत ,
तेरे अंदर बसी है।
जिस दिन तुझे ,अपनी जिंदा होने का पूरा एहसास हो जाएगा,
उसी दिन तेरे हौसले, जुनून और हिम्मत से एक नया इतिहास लिखा जाएगा।

तेरे भीतर है वो आग,
जो अन्याय को राख में बदल सकती है।
बस पहचान ले अपनी शक्ति को,
क्योंकि तू "औरत की ताकत" रखती है।
तू जननी है इस जग की,
तू दुनिया को बदलने की ताकत रखती है।

रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा,अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार)




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (5)

+

वन्दना सूद said

बहुत सुंदर रचना

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

नारी की शक्ति रूप होने का सुंदर मनोभाव 👌🙏🙏

पल्लवी श्रीवास्तव said

बहुत- बहुत धन्यवाद 🙏🙏😊😊

सरिता पाठक said

पल्ल्वी जी बहुत सुन्दर रचना सर्वश्रेष्ठ सचमुच औरत को अपनी शक्ति को स्वयं पहचाना होगा वो अबला नहीं सबलाशक्ति है दुर्गा है यदि वो चाहे तो सब कुछ कर सकती है दिल छू लिया 👌आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें ईश्वर apko ढेर सारी खुशियाँ दे 🌹❤️🙏

ललित दाधीच said

आपने नारी की बहुत सुंदर व्याख्या करती है, नर और नारी दोनों समान है, समाज जैसे पुरुष का आदर करता है जो कि समाज की आदत में ढल गया है वैसे नारी को वो स्थान मिलना चाहिए ❤️❤️💐💐💐🎯🎯❤❤❤🔥🔥🔥🙏🙏🙏🙂🙂🙂🎉🎉🎉। ऐसे ही लिखते रहें, गजब, नववर्ष की ढेरों शुभकामनाएं ❤️❤️🎉🎉

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