कोलिया गाँव की पावन धरा।।
२७.४'उ.अक्षांश,७४.५७'पू.देशांतर,
अर्दशुष्क थार के पूर्वीद्वार खड़ा है।
जिसकी दस हजार की आबादी हैं,
५२ हजार बीघा में विस्तार हुआ है।।
जिसकी कंचन जैसी चमक है,
यहाँ चंदन जैसी सौंधी महक हैं।
जिसे तप, त्याग से पुर्वजों ने सींचा,
कोलिया माटी में सौधी महक हैं।।
गाँव कोलिया की यह पावन धरा हैं,
खींवादास जी का आश्रम बड़ा है।
सांंगलिया जी का वो धूणा खड़ा है,
काले भैरव का यहाँ थान बड़ा है।।
वीरों, संतो की यह तपोभूमि हैं,
यह आभानगरी री उपकाशी हैं।
यहाँ मुख्य बाजार में श्री राम मंदिर हैं,
बाबा श्याम का निराला धाम यहीं हैं।।
सड़को का यहाँ जाल बिछा है,
सुविधाओं का यूं अंबार लगा है ।
बैंक, चिकित्सालय यहाँ बने है,
पोस्ट ऑफिस, पुस्तकालय सजे है।।
आपके स्वागत में हम सब खड़े है,
यहाँ चार चार प्रवेशद्वार खड़े है।
विराट बस स्टेंड, पेट्रोल पंप यहीं है,
कोलिया डुंगरी माताजी का मान बड़ा है।।
यहाँ पर तीन तीन तालाब बड़े है,
पास में प्राचीन शिवालय खड़े है।
बाबा रामदेव जी के मंदिर बड़े है,
यहाँ भक्तो का यूं दरबार सजा हैं।।
यहाँ सामाजिक सौहार्द बहुत हैं,
बालाजी के धाम बहुत सारे है।
हर समस्या का हल मिलकर करते हैं,
एक दुसरे का सब सहयोग करते हैं।।
यहाँँ खेल का मैदान बड़ा हैं,
हमें क्रिकेट से लगाव बेहद हैं।
यूवा गेंद के पीछे दौड़ रहे है,
सेना में जाने की तैयार हो रहे है।।
शहीदों का करते हम सम्मान हैं,
शहीदों की स्मृति में आयोजन हैं।
यहाँ कभी रक्तदान शिविर लगते हैं,
कभी कबड्डी से मैदान सजते हैं।।
हम शिक्षा में सबसे आगे हैं,
सेना में बहुत से युवा लगे है।
शिक्षको की यहाँ पर भरमार है,
राजनीति से हो रहा बंटाधार हैं।।
यह लोकतंत्र का तीर्थ बड़ा है,
यहाँ लगता राजनीतिक अखाड़ा हैं।
ईर्ष्या, द्वेष भी खुलकर नजर आते,
जब सामने हमारे चुनाव आते है।।
विकास कार्यो का शोर शराबा़,
पर होता नहीं यहां काम आधा।
दलित, पिछड़े समुदाय बड़े है
वो राजनीति के केन्द्र में खड़े है।।
कृषि अर्थव्यवस्था का आधार है,
यहां उद्योगों का पूर्णतःअभाव हैं।
पानी की समस्या बहुत बड़ी है,
सिंचाई सुविधाएं मिलती नहीं है।।
यहाँ खनन कार्य पूर्णतः बैन हो
बढ़ते प्रदुषण पर भी रोक लगे।
सिलिकोसिस से पीड़ित गांव में,
बेबस, लाचारी व बिमारी दुर हों।।
विकास मानवता से बड़ा नहीं हो,
माँँ की ममता की चित्कार नहीं हो।
उसमें बेबस बच्चों का दम घुटे नही,
जिंदा लोगों पर भवन खड़े नहीं हो।।
आज यूवा हमारे जाग रहे हैं,
राजनीति का रूख मोड़ रहे हैं।
भ्रष्टाचार को जड़ से मिटायेंगे,
हमे विकास की राह दिखायेंगे।।
ऊर्जा संस्थानों की सौगात मिले,
इसे उप तहसील का दर्जा मिले।
शिल्प कलाओं के संस्थान लगे,
नये नये सरकारी कार्यालय खुले।।
स्वरचित,मौलिक,अप्रकाशित है।
मुन्ना राम मेघवाल।।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।
Bhatimunnaram921@gmail.com


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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