वंदेमातरम् वंदेमातरम्!!
रोम रोम में रमा हुआ है
हिंदूस्तान का दम
वंदेमातरम् वंदेमातरम्!!
हिमालय सा उजला उजला
जन जन का है स्वाभिमान
सागर सा गहरा गहरा है
भरा अटल आत्मसम्मान
गंगा जमुना सरस्वती सा
संस्कृति का संगम.....
वंदेमातरम् वंदेमातरम्!!
हर नदियों की लहर लहर में
गीत ग़ज़ल है भारत की
हर मिट्टी की सौंधी गंध में
भक्ति अटल है भारत की
मनोभाव है खिला हुआ
फूलों सा हरदम....
वंदेमातरम् वंदेमातरम्!!
जल थल नभ से गरज रही है
सेनाओं का शौर्य हुंकार
हृदय हृदय से निकल रही है
वीर सपूतों की जयकार
इनकी हिम्मत से बढ़ता है
जन मन का दमखम.....
वंदेमातरम् वंदेमातरम्!!
पूण्य भूमि है, देवभूमि है
वीर भूमि है ये धरती
क्षत्राणी वीरांगनाओं की
जन्म भूमि है ये धरती
सीने में बलिदान भावना
कभी न होगी कम......
वंदेमातरम् वंदेमातरम्!!
वंदेमातरम् वंदेमातरम्!!
🙏🇨🇮🇨🇮🇨🇮🇨🇮🇨🇮🇨🇮🇨🇮🇨🇮🙏
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







