इस जहाँ में बड़े परवाने बने फिरते हो,
कमफ़हम, हर हँसी को ख़ुशी मानते फिरते हो।
दावा भी है तुम्हें कि हक़ीक़त-ए-ज़िंदगी जानते हो,
फिर क्यों मरने वाले की मौत का मातम मनाते हो?
पर्दानशीं औरतों के बारे में खूब जानते हो,
फिर उनके ज़ख़्मों के बारे में क्या जानते हो?
मरने-वरने की बातें तो बहुत करते हो,
क्या तुम ज़िंदगी जीना भी जानते हो?
तुम कहते हो, सब कुछ जानते हो,
क्या तुम औरत के हिस्से का दर्द भी जानते हो?


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







