देश से प्रेम करना झूठे शासक की युग में ख़ुद को बर्बाद होना है
कायनात में दुनियां सिमटी है बनाने वाले को किसी ने देखा नहीं
दुनियां मेरे लिए है और मेरी ज़िंदगी का पल भर भरोसा नहीं है
शहर और मुल्क किसी का मुश्ताकिल न रहा न ही रहेगा किसी का
हम एक बंदा हैं जबकि अठारह हज़ार मखलूक है जहान में खुदा का
देश से मोहब्बत क्यों करें जो के मेरा नहीं कब्जा जालिमो का है
इन्सान में रूह हैं देश वो दुनियां में नहीं बहुत कुछ छुपा है यहां
धरती पर बसने वाले बच्चे और जवान अपनी आचरण सजाओ
जान निछावर करो अपने माता पिता और सही दिशा की शिक्षा पर
अच्छी शिक्षा अच्छा चरित्र तुम्हें कायनात वाला चमकीला बना देगा
देश से प्रेम और इंसान से नफ़रत ये पैगाम खुदा नहीं है याद रखना वसी
भूख प्यास इन्सान को लगती है शहर को नहीं समझना ज़रूर
वतन चमकती है पैसे से एक घर के धन से चमकाना मुम्किन नहीं
वतन की मोहब्बत में दिल मुर्दा हुआ और बे घर हो गया बहुत से लोग
हासिल किया जिस किसी ने शिक्षा सारे वतन में नाम हो गया
नाम तो शैतान का भी धरती पर ज़िंदा है मगर हम इंसानियत में चाहते
आदिल है दिल मेरा अदल हो जिसमें उसके हवाले देश चाहता है वसी
न हम कुर्सी चाहते न ही कुर्सी से मोहब्बत करते दुनियां अदल चाहता है वसी
चमकता दमकता जब था मेरा वतन बुत परस्ती कम थी और इंसानियत ज़िन्दा था
इस युग में ख़ुद गर्ज शासक अपनी मुफाद के खातिर देश की आबादी को बंधक बना रखा है
देश से प्रेम करना झूठे शासक की युग में ख़ुद को बर्बाद होना है
वसी अहमद क़ादरी । वसी अहमद अंसारी
मुफक्किर ए कायनात । मुफक्किर ए मखलूकात
दरवेश । लेखक । पोशीदा शायर


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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