तीव्र पवन के झोंके अब, कानों को छूकर गुजरी
पावस की पहली बूंद जब
माथे से आ टकरायी
दूर गगन से दया निधि ने
अपनी छवि दिखाई
उमस उमस की उग्र जलन से
तड़पा था जग सारा
नम नम हुई पवन की मर्जी
सबको मिला किनारा
घूम घूम कर घुमड़ रहें हैं,कारी कारी बदरी
तीव्र पवन के झोंके अब, कानों को छूकर गुजरी।
दूर गगन से आ रही है
उड़ती हुई जल की बूंदें
राहत की सांसें मिल रही हैं
जन मन खुशियां गूंजें
स्याह गगन में उड़ते पंछी
मस्ती में अब झूमें
देख देख आंखें उत्कर्षित
और मन नाचे घूमें
बदरा गड़गड़ गरजे,चमचम चमके बिजुरी,
तीव्र पवन के झोंके अब, कानों को छूकर गुजरी।
हरियाली जो झुकी झुकी थी
अब कुछ तन कर हुई खड़ी
खेतों की अब हुई तैयारी
हल , बैलों की शान बढ़ी
जहां जहां तक नजरें जातीं
ऊंघती हुई घटाएं हैं
आंखें को दे चैन बड़ी
श्यामल धूर छटाएं हैं
कब होगी सावन-घन वर्षा,तरसे हैं मन मछरी
तीव्र पवन के झोंके अब, कानों को छूकर गुजरी।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







