ले जाए
मुझे कहीं दूर
खुद को पहचान न पाए कभी
भर जाए
मेरा मन उसमें
जिसमें तन्हाई की चोट न लगे कभी
फिसल जाए
मेरे आँसू वहीं
जहाँ कोई कुछ पढ़ न पाए कभी
आ जाए
एक दिन वैसा
जैसा कि खुद को अजनबी हो जाए कभी ॥

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
ले जाए
मुझे कहीं दूर
खुद को पहचान न पाए कभी
भर जाए
मेरा मन उसमें
जिसमें तन्हाई की चोट न लगे कभी
फिसल जाए
मेरे आँसू वहीं
जहाँ कोई कुछ पढ़ न पाए कभी
आ जाए
एक दिन वैसा
जैसा कि खुद को अजनबी हो जाए कभी ॥
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