यूं बेवफाई को भी सर आँखों पर बिठा रखा है
अपने दिल का दरवाजा दिनरात खुला रखा है
कट गई तमाम रात उसकी करवट नहीं बदली
अपने सीने पर मां ने रोता बच्चा सुला रखा है
जानते हैं ये गुजरा वक्त लौटता नहीं कभी भी
बूढी आँखों ने दीपक उम्मीद का जला रखा है
चन्द लफ्जों में बयां होंगी युग युगों की दास्तां
क्यूँ इन रिसालों ने सरपे आकाश उठा रखा है
दास दिल का दर्द जब आँखों में उतर आता है
अश्कों ने शायद बहने का अहद निभा रखा है. .


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







