मेरी कलम से निकली
शब्दों से, अगर कोई
गुनगुनाती स्वर तुम्हें
सुनाई देने लगे, तो,
समझ लेना कि, गुन गुनकर
कुछ भी नहीं लिखा है,
दिल से कसमसाती हुई
निकलती प्रीत तरंगों ने
मेरी उंगलियों को इतना
प्रेरित कर दिया कि, ये
पता ही नहीं चला कि, कब
कोरे कागज पर क्या लिख गया!!
अगर लिखा हो कि, तुम्हारी
आंखों ने शरारत कर हमें
तंग कर दिया, तो,फिर, तुम,
ये मान ही लेना कि, ऐसा
हुआ ही है,इसमें मेरी कलम
से निकली शब्दों का कोई
चमत्कार नहीं है, नहीं है, नहीं है!!
अगर इन शब्दों से तुम्हारी
सांसों में खुशबू आने लगे, तो
समझ लेना कि, तुम्हारे मन
के झील में, कोई पुष्प खिला है,
जिसका कोई नाम नहीं है,
और, अगर नाम है भी तो
शायद तुम्हें और हमें
ये मालूम ही ना हो!!
इन शब्दों को पढ़ना नहीं,
सिर्फ महसूस कर लेना
और कुछ भी ऐसी हरकतें
नहीं करना कि, लोगों की
नजरें तुम पर टिकने लगे!!
तुम्हारा अपना......
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







