जादूगरी के प्रभु हो कहाँ तुम,
अब तो प्रभु आ भी जाओ ना,
हो कहाँ कैसे तुम,
तुम प्रभु बहुत मशहूर हो इन खेलों में,
खबरों में हमेशा अग्रणी रहते हो,
अब ये भी बता दो कैसे किया ये सब,
और आगे भी हर पल भी कैसे करते हो,
चलो नहीं करते ये कहते हो तुम,
पर प्रभु हो भी कैसे जाता है,
और होता भी रहता है,
चलो ये भी कहते हो नहीं होता,
कि मैं ही हुआ हूं,
पर हुआ,
देखो प्रभु दुनिया को,
जिंदगी होती है,
होती रहती है,
पर जिंदगी नाम ही रह जाती है,
पर ये देखो,
कैसे जी जाती है,
लोग कैसे ये जिंदगी जीते हैं,
ये बताओ नाम ही रखना है जिंदगी को,
या जीना है जिएं ही रखना है,
क्या करना है,
क्या करते हो,
चलो कर की नहीं,
पर क्या होना है,
क्या होता है,
हो भी नहीं,
चलो प्रभु,
क्या सूझी थी,
क्या सूझ रख रहे थे,
क्या है सूझ तुम्हारी,
सूझ को समझा दो,
सूझ ही तुम्हारी सबकुछ,
सूझ बूझ हमारी नहीं,
तुम्हारी ही सूझ,
सबकुछ करवाती है,
लोग जिंदगी कहाँ जीते हैं,
जिंदगी नाम ने,
इसका वैभव,
विराट,अदृश्य, सूक्ष्मता, शून्य, अनंत
सबकुछ प्रभु तुम ही हो।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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