जो कुछ भी हो,
बस तुम सा हो,
जो तुमसे प्रेम करें,
शिकायत नहीं,
मन बहुत सवाल,
पर तुम्हें देखकर,
वो तुम्हें जवाब समझे,
तुम हो तभी ,
कुछ अंकुर फूटा है,
कुछ स्पंदन हुआ है,
तुम नहीं हो,
सब अपने में मस्त है,
इतना तो मैं,
तुमसे पूछकर,
मोहब्बत करता हूँ,
कि तुम्हें ठेस ना हो,
मैं मस्त नहीं रह सकता,
बिना तुम्हारे शामिल हुए,
क्योंकि एक मौत ने,
तुम्हें छीना,
तुमसे सबकुछ छीना,
जो तुमने जोड़ रखा था,
वो कोई पाया गया,
वस्तुओं ढ़ेर नहीं है,
तुम्हारी जिंदगी है,
बहुत बाद ,
बहुत छोटे से क्षण में,
एक कण के समान,
आभास और एहसास होता है,
कि जिंदगी हमारी है,
और यही एहसास तुम जोड़ चुकी थी,
जहाँ तुम जीने,
पर एक मौत ने ,
वो मेहनत और एहसास नहीं देखा,
बांध के तुम्हें ले गई,
वो संसार का आकार,
जो तुम्हारा तन बना,
तुम्हारे जाने के बाद किसी ने,
नहीं रखा,
ना किसी को एहसास हुआ कि,
इसी में जिंदगी थी,
वो बस तुम्हें पता था,
या मुझे पता था,
इस प्रेम के बाद,
तो संसार के जीवंत लोगों,
तुम्हें जलाया,
गाड़ा और क़ब्र कर दिया,
मैं रख सकता तुम्हें,
मिश्र की उन प्राचीन रीति की तरह,
पर मैं तुम्हारे परिवार से नहीं था,
तो तुम्हें वो छूने नहीं दिए,
बस तुम्हारे तन के जाने के बाद,
उससे पहले तुम्हारे ही जाने के बीच,
तुम और तुम्हारा तन,
दोनों जान के जाने के बीच,
मैं अकेलेपन के साखी से मिलने गया,
और आँसुओं की शराब पीकर,
बहुत ज़ख्म कुरेदें,
आज भी तुम्हारी याद है,
और वो याद को मैं,
मुझ सा कर दिया,
ताकि तुम्हें वो ना भूले,
मेरी मोहब्बत का क्या हुआ,
तुम्हें पता हो ऐसा मैं पता कर लिया,
वो याद बनकर रह गई,
ऐसी कि न वो आईना है,
ना चेहरा, ना कल्पना,
ना बिम्ब, ना सपना,
बस मैं रो सकता हूँ,
इस याद से,
तुम मेरे खुदा बन गए,
मुझे जीवन में नहीं लगा कि,
तुम मेरी मोहब्बत में इस तरह होंगे,
जो अब नहीं होंगे,
यही एक शिकायत है,
जो मैं कर सकता हूं,
मेरी मोहब्बत इस तरह थी।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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