हमें देखकर जो ‘माँ’
जिया करती थी,
उम्र के गुज़रते मोड़ पर
वो हमें भूल भी जाए-
पर, तुम उसे न भूल जाना।
समय के बहाव में
जो हमसे पूछती है,
“तुम कौन हो ?”
बेशक वो भूल गई
कि हम उसके बच्चे हैं,
“वो”तुम्हारी माँ है
पर,तुम यह सच न भूल जाना।
ज़िम्मेदारियों के बीच
यह राह आसान नहीं,
आज तुम्हारे वक्त के पास
वक्त नहीं।
पर याद रखना-
उनके वक्त के पास
शायद
कल नहीं !
वन्दना सूद
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







