1 ) कोई नदी के किनारे बैठे हैं
कोई अपने मन के किनारे बैठे हैं ।
2 ) मन को किताब बना दिया
फिर उसी में छिपा दिया ।
3 ) खुशी के किनारे बैठकर
गम के आँसू पी रही थी वो ।
4 ) मेरे मन में चाँद के लिए जगह नहीं
आसमान छूना ही मंजिल बन गया है ।
5 ) मन अभी भी जिंदा है
कोने में बैठकर आशा की खुशबू बिखेर रहा है ।
6 ) मेरी निगाहों में तेरे ही छवि है
अब होठों पे सुकून की हवा खुद निकल आती है ।
7 ) किताब की नोक से खुशबू फैल रही है
अब किताब खुशबू का निलय बन गयी है ।
8 ) जुबान पे एक बात छिपी है
वो होठों से ज्यादा आँखों में छलकती है ।
9 ) मेरी आँखों के नदी के किनारे एक कमल बैठी है
मन की लहरों की जोर से वो आँसू की तरह गिर पड़ी ।
10 ) तेरे होंठों के किनारे एक चाँद खिला है
अब तेरी बातों में चाँदनी की हवा चलती है ।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







