रात हो गई
अंधेरा छा गया चारों ओर
फिर भी एक नया सूरज निकलनेवाले है
हर सुबह की तरह तो नहीं
हर सुबह से बेहतर
जो मन के भीतर ज्वाला की तरह
एक आस को साँस समझकर जिंदगी चला रहे है
हवा की झोंक दीप को बुझा देती है
पर मन के भीतर आग को नहीं ॥

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
रात हो गई
अंधेरा छा गया चारों ओर
फिर भी एक नया सूरज निकलनेवाले है
हर सुबह की तरह तो नहीं
हर सुबह से बेहतर
जो मन के भीतर ज्वाला की तरह
एक आस को साँस समझकर जिंदगी चला रहे है
हवा की झोंक दीप को बुझा देती है
पर मन के भीतर आग को नहीं ॥
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