हम जिनके साथ जीना चाहते हैं,
उनके बिना भी जी सकते हैं…
बस, जीने का अर्थ बदल जाता है,
चेहरे पर मुस्कान रहती है,
मगर भीतर कुछ टूट जाता है।
जिनके साथ उम्र बिताने के सपने देखे,
कभी उन्हीं के बिना उम्र बितानी पड़ती है।
जिनके होने से हर दिन खूबसूरत था,
उनके न होने की आदत बनानी पड़ती है।
सच तो यह है कि इंसान किसी के बिना मरता नहीं,
बस अपने भीतर का एक हिस्सा
किसी की यादों के नाम कर देता है।
और फिर एक दिन…
वह हँसता है,
चलता है,
जीता है,
दुनिया की नज़र में सब ठीक होता है,
मगर दिल जानता है—
जिसके साथ जीना चाहा था, उसके बिना जीना भी ज़िंदगी का एक अधूरा सच है।
डॉ. अखिलेश श्रीवास्तव


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







