है हिंदी मेरे मन की भाषा
है यह मेरे तन की भाषा
है यह नील गगन की भाषा
है यह प्रेम मगन की भाषा
है यह जन जन की भाषा
है यह हर तरंग की भाषा
है यह अंतर्मन की भाषा
है यह हिंद की परिभाषा
है यह मेरी अभिलाषा
यह सारे संसार में बोली जाए
देख इसे अंग्रेजी भी शरमाए
देख इसे सारी भाषाएं
पीछे हट जाएं
या सिमट जाएं
जो इससे टकराए
वे अपना बन जाए
या चूर चूर हो जाए
यह इतनी दूर तक जाए
कि स्वर्ग स्वयं शरमाए
कि अंबर झुक जाए
कि पवन रूक जाए
यह गंगा जैसी बहती जाए
भारत मां के शीष पर
यह ताज बन कर
यह इठलाए
यह इतराए।
गुदरी सिंह के टोला, पांडे पुर, बैरिया, बलिया, उत्तरप्रदेश


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







