हास्य कविता : हड्डी पसली....
एक लड़के ने एक लड़की को
एक लात और मुक्का दिया
फिर उसने उसको एक
बहती नदी में धक्का दिया
मैंने उस लड़की को नदी में छलांग
लगा कर बाहर ले आया
इस तरह से उसको मैंने
मरने से बाल बाल बचाया
लड़की बोली, उस नदी में न
तैरती न कुछ करती
अगर तुम न होते तो
मैं आज कब की मरती
ये तुम्हारा काम मुझ
को बड़ा भाया
मेरे दिल में तुम को प्यार
बहुत आया
बास अब तुम
इतना कर दो
मेरे मांग में जरा
सिंदूर भर दो
ताकि तुम्हारी
बीबी हो जाऊं
तुम्हारे अपने
बाहों में सो जाऊं
मैं बोला, कौन सी
दुनिया में रह रही हो ?
जानती भी हो ये
तुम क्या कह रही हो ?
तुम्हारी ये बातों पर
बहुत गड़बड़ी है
मेरे घर में पहले से ही
मेरी बीबी पड़ी है
अगर तुम से शादी करूं
बहुत घुसा उतारेगी
डंडे डंडे से मुझ को
तो वो मारेगी मारेगी
देखो तुम को भी
वो नहीं छोड़ेगी
तुम्हारी भी वो हड्डी
पसली तोड़ेगी
तुम्हारी भी वो हड्डी
पसली तोड़ेगी.......
netra prasad gautam


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







