हर किसी के हाथ में पत्थर है आजकल,
फिर उसी की जद में अपना सर है आजकल।
राह का परिचय जिसे ता-उम्र ना हुआ,
खेल है तक़दीर का रहबर है आजकल।
हाँफता है चंद क़दम चल-चल के जो यहाँ,
अब बड़ा वो योग का डॉक्टर है आजकल।
मैं भी तो चुप ही रह गया हर ज़ुल्म देखकर,
चुप रहूँ तो जिंदगी बेहतर है आजकल।
मायने भी लफ़्ज़ का जो जानता नहीं,
सुन रहा हूँ अब बड़ा शायर है आजकल।
हर तरफ़ तोहमत लगी है बेवजह लेकिन,
वही तन्हा सच का पैकर है आजकल।
सच कहो तो झूठ का है शोर हर जगह,
इसलिए ही सच यहाँ छिपकर है आजकल।
लूटता है जो शहर नफ़रत के नाम से,
वही तो इस मुल्क में मोतबर है आजकल।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







