एक दिन उड़ना है तूझे, आसमान में,
पंखों को संवारो अभी, अपने मकान में!
जिस दिन तलब लगेगी तूझे, जद्दोजहद का,
थकने लगोगे बैठकर, ऐशोआराम में!
सागर में कौन जाने, कितने रत्न हैं भरे,
गोते लगाना सीख लो, आंधी तूफान में!
युद्ध के मैदान में ,जाना है वीर- सा,
रखना धार करके, तलवार म्यान में!
खामी बहुत है आज भी "समदिल" तुम्हारे में,
ठीक -ठीक झांको अपने, गिरेबान में!!
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







