तुम्हारे साथ दुनिया थमी सी लगती है।
देखते रहने से तलब ही नही घटती है।।
तुम्हारे सारे गम ले लेने को मन करता।
हर उठती तरंगों से काई सी छटती है।।
ऐसा लगता है उसको भी जरूरत मेरी।
इसलिए कलम की भी उससे पटती है।।
वो इतना ज्यादा शामिल हैं मुझमें अब।
कोई कहे उसे उससे मेरी घड़ी चलती है।।
मेरी किताब को भी उसकी चाहत लगी।
किस कदर 'उपदेश' वो इशारे करती है।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







