चेहरा, है उसका एक, समंदर की तरह
उठती गिरती पलकें, हैं लहर की तरह।
वो हंसी तो, गालों पर,जो, दो डिंपल बने
खींच लिया हमें, कातिल भंवर की तरह।
होंठ भींच लेना और,आंखों से घूरना
लगता है, तूफानों की,कहर की तरह।
पढ़ना है उसकी, खामोशी की गहराई को
सुबह सुबह अखबार की,खबर की तरह।
मन के नौके में सवार, करूं विहार अब,
जिंदगी की खूबसूरत,सफर की तरह।।
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







