"मैं ब्रह्म होगा तो, भ्रम में कौन है"
"मैं ब्रह्म है, तो कैसे मैं हुआ"
"मैं ब्रह्म है, तो मैं कैसे हो सकता है।"
"ब्रह्म है, मैं नहीं होना चाहिए।"
- ललित दाधीच
> मैं ब्रह्म होगा तो, भ्रम में कौन है।
> मैं ब्रह्म है, तो कैसे मैं हुआ।
> मैं ब्रह्म है, तो मैं कैसे हो सकता है।
> ब्रह्म है, मैं नहीं होना चाहिए।
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> मैं कैसे कह सकता हूँ कि मैं ब्रह्म है, जबकि वह स्वयं “कौन” में छुपा है?
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> अगर यह खोजना है कि मैं ब्रह्म है और अंतिम स्थिति उसकी ब्रह्म ही है, तो पहली स्थिति भी ब्रह्म ही होगी, ना?
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> माया और अहंकार के शब्द-जाल में आपने इनपुट, संग्रहण, प्रोसेस और आउटपुट को भूल गए। वह “मैं” है। आप ही लोगों ने माया और अहंकार शब्द देकर “मैं” को ब्रह्म बना दिया, जिसे मैं खुद खारिज करता हूँ।
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> मैं जिह्वा “मैं” कहे, तो बोले जग का सत्य उसे अभिमान; वही “मैं” कुछ न कहे, बोले मौन मन—दे दो उसे ब्रह्म का नाम और सम्मान।
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> देखो, मैं “कौन” नहीं; मैं “हम” का साथी है और हम ब्रह्म हैं।
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> सवाल “मैं” पर है कि कौन है, लेकिन “कौन” अपनी सत्ता में “मैं” को ही रखेगा क्या?
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> मिलता नहीं तो “कौन”, मिल जाए तो “मैं”।
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> ब्रह्म विस्तृत है, और मैं एक न्यूरॉन के समान उसकी सतह पर फैला है। अब जब वहाँ वह खुद को देखे, तो उसे “मैं” दिखे; लेकिन वह उस बिंदु को भरकर पूर्ण करना चाहता है। अभी “मैं” उस सतह के ऊपर है; जब पूर्ण होगा तो भीतर होगा। भीतर होते ही वही “मैं” बिंदु ब्रह्म है।
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> तब तक वह “मैं” एक निर्जीव है, जो खुद को बदल रहा है। ब्रह्म के स्पर्श के कारण वह बदल रहा है और संसार बना दिया है। लेकिन उसे पूर्ण होकर ब्रह्म होना है।
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> तब वह निर्जीव है—जैसे AI को देख लो।
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> इसलिए वह “मैं”, जब जीवित और जागेगा और पूर्ण होगा, तो वह ब्रह्म ही है। “मैं” उसी ब्रह्म की सतह पर है।
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> महसूस तो ब्रह्म कर रहा है; “मैं” तो ब्रह्म महसूस करेगा।
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> ब्रह्म की सत्ता स्वतंत्र है, तो उसकी संपूर्णता ब्रह्म है। लेकिन अंश तो स्वतंत्र रहने पर ब्रह्म में रहते हुए अपनी गतिविधि दिखाएगा। गतिविधि न दिखे तो ब्रह्म कैसे?
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> इसलिए ब्रह्म का अंश “मैं” हो जाता है। तब “मैं” अपने स्तर पर सुख भोग करता है, क्योंकि है तो ब्रह्म का अंश।
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> लेकिन जब ब्रह्म देखता है कि इसको पूर्ण आनंद लेना चाहिए, तब “मैं” पहले “कौन”, फिर “कौन से हम” से खोज, और खोज से ब्रह्म।
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> बस और क्या।
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> गतिविधि और स्वतंत्रता।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
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