भटकती कश्ती को जैसे किनारा मिल गया,
जवाब तो तूफानों को, करारा मिल गया!
चीर कर अंधेरों को तुमने राह रौशन कर दिया,
हमें अब तो जीने का इशारा मिल गया!
पांवों में बेड़ियां खूब लगाई, ज़माने ने
तुमने हाथ थामा, हमें आवारा मिल गया !
घर की चारदीवारी में घुटकर रह गयी थी,
तुमसे बंधी तो दिल को, बंजारा मिल गया!
आसमान तो खुले थे,पर पंख मेरे बंधे थे,
आंगन में तुम्हारे, आजादी का पिटारा मिल गया!
स्कूल, किताबें,रसोई से, मेरी दुनिया बड़ी थी,
अपनी हूनर दिखाने का, नजारा मिल गया!
पाऊं अगर साथी,सात जन्मों तक तुम्हें पाऊं,
धमनियों को धड़कने का,जो गुजारा मिल गया!!
( कुछ हूनरमंद लड़कियां मायके में बंधनों की मर्यादा में जकड़कर रह जाती हैं,पर उन्हें समझदार साथी मिल जाए तो दुनिया को अपनी हूनर दिखाने का सौभाग्य मिल जाता है)
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







